someone’s eye - किसी की अधमुंदी पलके
कवि चिरंजीत का काव्य ‘किसी की अधमुंदी पलके ‘ प्रस्तुत करता हुँ.
किसी की अधमुंदी पलके
किसी की अधमुंदी पलके, मुझे सोने नही देती
ह्दय की धडकनों में आहटे ये मदभरी कैसी
मुझे सोने नहीं देतीं, सजग होने नहीं देती
तिमिर में आज ये परछाईयां भी मुस्कराती है
बिजलियां कौंधकर तम में मुझे खोने नही देतीं
खुले किस रजनिगंधा के अरे ये केश सुरभीले
कि ड्गमग रात मन का बोझ भी ढोने नहीं देतीं
सितारे चल दिये, चल दी, दिये की लौ पहरुये-सी
घटाओं-सी घिरी अलके सुबह होने नहीं देती
ये जीवन सत्तत हारों की, अभावो की कहानी है
मगर मधुरात की स्मृतियाँ मुझे रोने नही देतीं.
-कवि चिरंजीत
