panghat-पनघट

February 14, 2006

my love -प्रिय

Filed under: काव्य

प्रिय लिखकर, मै नीचे लीख दू नाम तुम्हारा कुछ जगह बीच में छोड दूं
नीचे लीख दूं-
“सदा तुम्हारा ”!
लिखा बीच में क्या
यह तुमको पढना है
कागज पर मन की भाषा का
अर्थ समजना है जो भी अर्थ निकालोगी तुम
वह मुजको स्वीकार है झुके नयन,मौन अधर या कोरा कागझ
अर्थ सभी का प्यार है !
कवि विठलभाई पटेल






















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