i have no answer - मेरे पास कुछ उतर नहीं
सभी प्रश्नो के उतर नही हौते और कुछ उतर ही ऐसा होत है के वे खुद ही प्रश्न हौ जाते है.डा रमासिंह अपने काव्य मै यही कहते है :
मेरे पास कुछ उतर नहीं
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प्रश्न तो बिखरे यहां हर ओर है
किंतु मेरे पास कुछ उतर नहीं
सांझ आई, चुप हुए धरती गगन
नयन में गौधूलि के बादल उठे
बोझ से पलकें झँपी नम हो गई
सांझ ने पूछा उदासी किस लिए
किंतु मेरे पास कुछ उतर नहीं
रात आई कालिमा धिरती गई
सघन तम में द्रार मन के खुल गए
दाह की चिनगारियाँ हँसने लगीं
रात ने पूछा, जलन यह किसलिए
किंतु मेरे पास कुछ उतर नहीं
नींद आई , चेतना सब मौन हे
देह थक कर सो गई, पर प्राण को
स्वप्न की जादु भरी गलियां मिली
निंद ने पूछा भुलावे किस लिए
किंतु मेरे पास कुछ उतर नहीं.
=डा. रमासिंह
