every moment fo u-हर घडी तेरी हुई
वैसे सर्दी की मौसम की रात मै किसी के विरह मे मन व्याकुल उठता है कारन के रात लंबी होती है,दिन तो कट जाता है परंतु रात कटती नही.
कवि आरसी प्रसाद सिह अपने काव्य मे कुछ ऐसा ही कुछ कहते है :
हर घडी तेरी हुई
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आज से तु सहचरी मेरी हुई
कामना की हर घडी तेरी हुई
वंदना के बोल पर जीवन पला
साधना के देश में पंछी चला
यह प्रणय की गांठ ऐसी है मधुर
वासना की मधुकरी घेरी हुई
मौन था मधुकर अकेला प्यार का
दुर था सपना मधुर अभिसार का
एक दिन ऐसा कुसुम वन में खिला
सुरभि हो जिसकी कडी बेडी हुई
कौन आकर स्वप्न में यों छल गया
आरती का एक दीपक जल गया
अधर नीरव रह गये,बोले नयन
रागिनी जब हँस पडी छेडी हुई.
=कवि आरती प्रसाद सिंह
