desire in heart - ईच्छा मन में है
बहुत सी मन मे ईच्छाए होती है परंतु भाग्य मे नही मिलता परंतु प्रयत्न करने से कभी कभी सफलता मिल भी जाती है. आज कवि भवानी प्रसाद मिश्र का काव्य आपके संन्मुख प्रस्तुत करता हुं
ईच्छा मन में है
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तुम्हें काम है, किंतु एक क्षण
पास बैठ जाने की ईच्छा मन में है
बहुत पास हुँ , किंतु एक क्षण
और पास आने की ईच्छा मन में है.
बहुत दिनों से पास बैठकर
चुपके ईकटक,देखा नहीं तुम्हारा मुखडा
बहुत दिनों से पास बैठकर
मैने तुमसे कहा नहीं है जी का दुखडा
बहुत दिनों के बाद आज फिर
वैसा सुख पाने की ईच्छ मन में है.
आज परम आषाढ बरसता
हैं आच्छादित दशों दिशायें
जाने कब से घिरी नहीं थी
ऐसी निविड अँधेरी
रिमझिम - भरी निशायें
आज मेघ की तरह दु:ख का
राग तनिक गाने की ईच्छा मन में है.
=कवि भवानी प्रसाद मिश्र
