elopement love-पलायनवादी प्यार
प्यार :
एक उडता उडता समाचार
ओर अन्त मे
वो भी हो निराधार.
जिन्दगी :
पत्थर की लींक नही
भूल जाना
शायद ठीक नहीं
याद :
ताश में ज्यों कट जाये ईतवार
हर दृष्टि यों
सिलवटे चढाती हुई
ज्यों ‘एश-ट्रे’ धुआंती हुई
प्यास :
दुर्घटना-ग्रस्त हो जाय नई कार
डुबते मन से
मौन संघर्ष
कौन कर पाए
वर्ष-प्रति-वर्ष
दर्द :
खुदकुशी का घर
कुतुबमीनार
=कवि भूपेन्द्र कुमार स्नेही
