प्रगति की पृष्ठभूमि
जो व्यक्ति दफतर के सर्द कमरे में बैठा हुआ है,
उसने जवानी मे कम-से-कम,
दस कुँवारियों से बलात्कार किया है ।
काँकटेल पार्टी में वह किसी सुन्दरी की,
नाभि पर नजर गडाये मन-ही-मन कामार्त हो उठता है,
वह व्यक्ति पाँच सितारा होटेल में अकसर,
अलग-अलग स्त्रियों की देह से जायका बदलता है ।
वह व्यक्ति घर लौटकर बीवी को पीटता है,
एक रुमाल या,
शर्ट के काँलर के लिए ।
वह व्यक्ति दफतर में बैठकर लोंगो से बातें करता है,
सिगरेट पीता है,
फाईलें छानता है,
घण्टी बजाकर कर्मचारी को बुलाकर डाँट पिलाता है,
बेयरे से चाय मँगाता है,पीता है ।
वह व्यक्ति लोगों को चरित्र का प्रमाण-पत्र बाँटता है ।
जो कर्मचारी दबी जुबान में बातें कर रहा है,
जो नहीं जानता कि, वह कभी नहीं समझेगा,
कितनी ऊँची आवाज में वह गरज सकता है घर में,
उसकी जुबान कितनी बेहूदी हो सकती है,
उसकी हरकतें कितनी अश्लील हो सकती है ।
वह यार-दोस्तों को जुटाकर सिनेमा का टिकट कटाता है,
नुक्क्ड पर बैठ राजनीति और कला-साहित्य पर,
गरमागरम बहस करता रहता है ।
किसी एक ने आत्महत्या की है,
उसकी माँ,
या दादि,
या फिर परदादी ने ।
घर लौटकर वह पत्नी को पीटता है,
एक साबुन के लिए या,
बच्चे को निमोनिया हो जाने पर,
जो बेयरा चय ला देता है,
जेब में लाईटर रखता है,
दो-चार रुपये बख्शीस पाता है,
उसने वाँजपन के कारण पहली बीवी को तलाक दे दिया है,
लडकी पैदा करने की वजह से दूसरी को,
और तीसरी बीवी को तलाक दिया है दहेज न लाने के कारण,
वह चौथी बीवी को घर लौटकर पीटता है,
दो कच्ची मिर्च या एक मुट्ठी भात के लिए ।
—तसलीमा नसरीन
